बेटी घर की लक्ष्मी
बेटी घर की लक्ष्मी
लड़के ज्यादातर अपनी पॉकेट मनी मैसेज सेव नहीं कर पाते हैं क्योंकि वह शायद घूमते रहते हैं या उन्हें बाहर जाने का मौका मिल जाता है मार्केट जाते रहते हैं घर के काम से भी जाते रहते हैं शायद यही वजह हो सकती है कि वह पैसे से बना कर पाए या फिर यह भी हो सकता है कि पांचों उंगली एक जैसी नहीं होती कहते हैं तो बहुत से लड़के ऐसे होते हैं जो अपने पॉकेट मनी में से पैसे सेब कर लेते हैं
लड़कियों की अपेक्षा कहूं तो लड़कियां लड़कों से ज्यादा क्लेवर होती है क्यों वह अपने पैसों को अच्छे से सेव भी कर पाती हैं क्योंकि वह घर के कामों में भी रहती है और घर पर रहती है शायद यही वजह हो सकती है कि वह पैसे खर्च अपनी पॉकेट मनी में से सारी की सारी पॉकेट मनी निवेश सेव कर लेती है कभी-कभी तो कुछ भी नहीं खा पाते हैं शायद इसीलिए इंडियन रिवाज में आज भी बेटी को लक्ष्मी के रूप में देखते हैं
अगर घर में कोई परेशानी आती भी है तो वह अपने पॉकेट मनी में से भी पैसे खर्च करने में संकोच नहीं करती है या घर में भाई को जरूरत हो सकती हो या घर में पैसे ना रहे हो जरूरत हो पिताजी को जरूरत हो बचपन में हम बहन भाइयों को ₹3 रुपए मिला करते थे
हम तो बहन भाई उन पैसों को पूरा खर्च का कर दिया करते थे मस्ती मस्ती में मेरी बड़ी सिस्टर हमेशा उन पैसों में से 2 या 1 रुपे सेव कर दिया करती थी रोज 1 दिन घर में पैसे ना होने की वजह से घर का कुछ राशन खत्म हो गया दो सिस्टर ने कहा मेरे पास कुछ पैसे हैं आप उनसे घर का एक-दो दिन का खर्चा चल जाएगा तो आप ले लीजिए
तभी इतने सारे पैसे कहां से आए होली में रोज पैसे सेव किया करती थी और तकरीबन उसके पास ₹2000 निकले तो कहते हैं पैसों की जरूरत हमेशा पड़ी रहती है पैसों को सेव करते रहना चाहिए और शायद यह बेटी को सूट भी करता है बेटी लक्ष्मी का रुप होती है

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